काठमाण्डू, १४ वैशाखः राष्ट्रिय योजना आयोगक सदस्य डा. सञ्जय आचार्य अगिला आर्थिक वर्षके बजेटसँ सुशासनक आधारमे दीर्घकालीन सुधार एवं राष्ट्रिय अर्थतन्त्रमे गुणक प्रतिफल सिर्जना होबाक बतौलैन अइछ ।
नेपाल व्यवस्थापन सङ्घ अगिला आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के बजेटक सम्बन्धमे आयोजन कएने परामर्श་कार्यक्रममे आचार्य कहलैन, “वर्तमान सरकारसँ आम जनताके पैघ आशा आ अपेक्षा छै । मुदा, विद्यमान समस्या एकाएक सिर्जना नै भेलासँ सब समस्या एकेटा बजेटसँ समाधान होबाक अपेक्षा नै राखबाक चाही ।”
राष्ट्रिय योजना आयोग समपूरक आ विशेष अनुदानक विधि आ प्रक्रिया परिवर्तन करबाक सङे स्रोतसाधनक हिसाबसँ प्रदेश आ स्थानीय सरकारकेँ सबल होबाक लेल प्रेरित करत से हुनक कहब छलैन ।
अर्थतन्त्रमे ८० प्रतिशत आ रोजगारीमे ८५ प्रतिशत योगदान क रहल निजी क्षेत्रक आवाज सरकारके सुनबाक चाही आ सम्मानजनक व्यवहार होबाक चाही तइपर आचार्य जोड़ देलैन । करके दर घटेबाक आ दायरा विस्तार करबाक विषय सन् १९८० के दशकसँ विश्वभैर प्रचलनमे आएल चर्चा करैत औचित्यपूर्ण कर लगा क स्वेच्छासँ कर चुक्ता करबाक प्रणालीके विकास कएलाक बादा मात्रे दायरा विस्तार होबाक ओ धारणा व्यक्त केलैन ।
पूर्वअर्थमन्त्री डा. युवराज खतिवडा रोयल्टीके रुपमे ‘रुल अफ थम्ब’के विद्यमान सूत्रसहित समपूरक आ विशेष अनुदानक सूत्र परिवर्तन करबाक लेल सरकारकेँ सुझाव देलैन ।
ओइ अवसरमे टिप्पणीकर्ता डा. रमेशचन्द्र पौडेल सुशासनक लेल ‘डिजिटलाइजेसन’के महत्त्वपूर्ण भूमिका होबाक बतौलैन । इन्स्टिच्युट अफ चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट्स नेपालक पूर्वअध्यक्ष सुदर्शनराज पाण्डे अखन कुल बजेटके १७ सँ २० प्रतिशत मात्रे पुँजीगत बजेटदिस विनियोजन भ रहल आ ओइमे वास्तविक खर्च कम रहल परिप्रेक्ष्यमे पुँजी निर्माण कमजोर भेल बतौलैन ।
नेपाल चेम्बर अफ कमर्सके वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक मल्होत्रा अर्थतन्त्रमे समग्र माँग कमजोर भ रहल अवस्थामे घरजग्गा आ निर्माण जेहन क्षेत्र चलायमान बनोनाइ आवश्यक रहल उल्लेख करैत भ्याटके बहुदर कायम होबाक चाही तइपर जोड़ देलैन । (रासस)





